भारतीय वायु सेना अपने बल और ऊँची उड़ानों के लिए जानी जाती है। कई बार भारतीय वायु सेना का प्रदर्शन और साहस भारतवासियों को गर्व की अनुभूति करता है। लेकिन अगर इस सेना का कोई भी अंश अगर अपने देश से ही दगाबाजी के दौर पर उतर आये तो यह भारत के लिए चिंताएं बढ़ा सकता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर MS. सभरवाल पर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
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बताया जा रहा है कि कमांडर ने दुश्मन को खुफिया जानकारी पैसों में बेच दी। जानकारी के अनुसार सभरवाल ने ड्रोन यूनिट की संवेदनशील जानकारी शेयर की है। जांच में पता चला है की उन्होंने एक डील की थी जिसमें वह चाहते थे कि इस इंफॉर्मेशन को देने के बाद उनकी डिमांड पूरी की जाए। उन्होंने पैसे और न्यूड इमेज की डिमांड रखी।
कथित तौर पर यूनिट की रणनीतिक तैनाती वाली जगहों, ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर, ड्रोन ट्रायल, टारगेटिंग प्रक्रिया और लॉन्च क्षमता से जुड़ी जानकारी साझा की गई। बता दें कि विंग कमांडर ने एक दुश्मन खुफिया अधिकारी, जिसे इन्वेस्टिगेशन में पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर यानी PIO बताया गया है, के साथ कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर की।
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पांच साल में चुनी जगहों की दी जानकारी
जांच में पाया गया कि लीक किये गए दस्तावेजों में ड्रोन यूनिट की दो ऑपरेशनल तैनाती वाली जगहों की जानकारी भी शामिल थी। यह वह जगह थी जिसे ढूंढ़ना आसान नहीं था यहां तक कि इसकी पहचान करने में भी पांच साल लग गए थे। इस जानकारी के लीक होने के कारण खुफिया एजेंट्स को अब इन ड्रोन की तैनाती को बदलना होगा। जांच में आगे इन्वेस्टीगेशन कर पता चला है कि चार पायलट और 180 एयरमैन वाली संरचना तथा एक साथ कई ड्रोन संचालित करने की क्षमता की जानकारी भी लीक की गई है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक सभरवाल ने एक्सरसाइज एरिया के भीतर ड्रोन ट्रायल फायरिंग की रिकॉर्डिंग कर भेजी। यह वीडियो उन्होंने अपनी पर्सनल डिवाइस के माध्यम से भेजा। इन वीडियो में ड्रोन सिस्टम की ऑपरेशनल परफॉर्मेंस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी होने का दावा किया गया है।
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टारगेटिंग और कंट्रोल सिस्टम की जानकारी भी जांच में
जांच एजेंसियां कथित तौर पर यह भी देख रही हैं कि ड्रोन को लक्ष्य से जुड़ी जानकारी किस तरह दी जाती है और यूनिट कितनी तेजी से ड्रोन को ऑपरेशन के लिए तैयार कर सकती है। जांच में दावा किया गया है कि अधिकारी ने टारगेट कोऑर्डिनेट्स के संचार और ड्रोन की तेजी से लॉन्च करने की क्षमता से जुड़ी जानकारी भी साझा की। ऐसी जानकारी किसी विरोधी को किसी सैन्य सिस्टम की कार्यप्रणाली समझने में मदद कर सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी दुश्मन के लिए जरूरी हो सकती है क्योंकि सभरवाल द्वारा वह जानकारी दी गई है जिससे समझकर अनोखी रणनीति या काउंटरमेजर्स तैयार किया जा सकता है। इन्वेस्टिगेशन में यह भी दावा है कि वीडियो भेजने के बाद उसे डिलीट करने के निर्देश दिए गए थे।





