होर्मुज विवाद से भारत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पेट्रोल-डीजल से रुपये तक पड़ेगा असर

ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए समुद्री रास्ते में लंबे समय तक रुकावट आने पर कच्चा तेल महंगा हो सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ देश के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर भी पड़ सकता है

Palak Gupta

17 अगस्त 2026

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होर्मुज विवाद से भारत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पेट्रोल-डीजल से रुपये तक पड़ेगा असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बयान जारी किया है जिसको देखते हुए ऐसा लग रहा है कि वैश्विक तनाव को और भी उजागर हो सकता है। बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा कि जल्द ही ईरान को हारने के बाद अमेरिका होमुर्ज स्ट्रेट को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लेंगे।

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युद्ध जीतते ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का इलाका घोषित कर दिया जाएगा। बता दें कि इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया था कि होर्मुज पर उनका पूरा कंट्रोल है, हालांकि इस बयान को ईरान ने खारिज करते हुए कहा था कि यह अहम समुद्री मार्ग अभी भी अवरुद्ध है और तेहरान की शर्तें स्वीकार किए जाने तक इसे दोबारा पूरी तरह नहीं खोला जाएगा।

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इसके बाद ईरान ने अमेरिका के दावे को खारिज करते हुए साफ संकेत दिया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर किसी अमेरिकी कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। ट्रंप की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब जंग और हमलों के कारण होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाज काफी कम हो गए हैं। इसी के साथ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के आंकड़े अब एक दिन में सिर्फ पांच ही गुजरते हैं जहां पहले कभी एक दिन में 130 जहाजों की आवाजाही हुआ करती थी।

ऐसे में कई मध्य पूर्व देशों के मन में यह सवाल चलता है कि क्या अमेरिका कानूनी रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा कर सकता है ?बता दें कि होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाके पर अमेरिका ने नाकाबंदी तब करनी शुरू की जब ईरान और अमेरिका के बीच में द्वेष बढ़ा लेकिन फिर भी अमेरिका होर्मुज पर अपना दबदबा नहीं चला पाया क्योंकि होर्मुज किसी एक देश की संपत्ति नहीं है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में तटीय देशों की संप्रभुता बनी रहती है। लेकिन इंटरनेशनल जहाजों के आवागमन के लिए खास नियम लागू होते हैं।

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क्या होर्मुज विवाद से भारत पर भी पड़ेगा असर ?

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ना भारत के लिए सिर्फ विदेश नीति या समुद्री सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। होर्मुज के रास्ते तेल की आवाजाही प्रभावित होने पर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इसका बोझ बढ़ना तय है। 17 अगस्त को भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत 91.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अगस्त में अब तक इसका औसत करीब 88.51 डॉलर प्रति बैरल रहा है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम और बढ़ सकते हैं। इसका असर सबसे पहले तेल कंपनियों की लागत पर पड़ेगा। इसके बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि, इसका असर कितनी जल्दी और कितना होगा, यह कच्चे तेल की कीमत, सरकार की नीति और तेल कंपनियों के फैसले पर निर्भर करेगा।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.