बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट जीतने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम शुरू करने की बात कही है। इसी दौरान उन्होंने युवाओं, बच्चों, गरीबों और बुजुर्गों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चार बड़े ऐलान किए हैं। इन घोषणाओं में रोजगार, शिक्षा, राशन और पेंशन जैसे मुद्दे शामिल हैं।
प्रशांत किशोर ने सबसे पहले युवाओं के रोजगार को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अगले एक से दो साल में बांकीपुर क्षेत्र के कम से कम 10 हजार बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने का है। इसके लिए युवाओं से अपना अपडेटेड सीवी और बायोडाटा उनके कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। उनका कहना है कि देशभर में मौजूद अपने संपर्कों के माध्यम से युवाओं को बड़ी कंपनियों से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, इसके लिए कुछ युवाओं को रोजगार के लिए बिहार से बाहर भी जाना पड़ सकता है।
दूसरा बड़ा मुद्दा शिक्षा से जुड़ा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है। उनके अनुसार बांकीपुर में बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं। ऐसे में लगातार बढ़ती स्कूल फीस माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बन गई है। उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक निजी स्कूल संचालकों से बातचीत करके ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जाएगी, जिससे बच्चों की पढ़ाई का खर्च कम किया जा सके।
तीसरा ऐलान राशन कार्ड और मुफ्त अनाज से जुड़ा है। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि अगर उन्हें तीन महीने का समय दिया जाए तो राशन कार्ड बनवाने के नाम पर होने वाली रिश्वतखोरी को रोकने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने मुफ्त अनाज वितरण में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार की ओर से पांच किलो मुफ्त अनाज देने की बात कही जाती है, लेकिन कई गरीब परिवारों तक पूरा अनाज नहीं पहुंच पाता। उन्होंने दावा किया कि व्यवस्था में सुधार करके लाभार्थियों को उनके हिस्से का पूरा पांच किलो अनाज दिलाने की कोशिश की जाएगी।
चौथा ऐलान बुजुर्गों की पेंशन को लेकर किया गया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के जिन बुजुर्गों को 1100 रुपये की पेंशन नहीं मिल रही है, वे उनके कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को पेंशन दिलाने की व्यवस्था करने का दावा किया है। इससे उन बुजुर्गों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।
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प्रशांत किशोर के इन ऐलानों के बाद बिहार की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। खासकर 10 हजार युवाओं को निजी नौकरी दिलाने के दावे को लेकर बीजेपी की ओर से सवाल उठाए गए हैं। बीजेपी ने इस मुद्दे पर उन पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार से पलायन रोकने की बात करने के बावजूद युवाओं को बाहर नौकरी के लिए भेजने की बात की जा रही है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर ने भी इन सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
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कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर के चारों ऐलानों का सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से है। रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं, महंगी शिक्षा से परेशान अभिभावकों, राशन की समस्या झेल रहे गरीब परिवारों और पेंशन की उम्मीद रखने वाले बुजुर्गों को इन घोषणाओं से उम्मीद बंधी है। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन घोषणाओं को जमीन पर कितनी जल्दी और किस तरह लागू किया जाता है। आने वाले समय में इन वादों पर होने वाली कार्रवाई से ही यह साफ होगा कि प्रशांत किशोर अपने दावों को कितनी मजबूती से पूरा कर पाते हैं।




