शाजापुर जिले में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अनगिनती रुपये की हेरफेर नजर आ रही है। यह सुविधा गांव के आदिवासी हितग्राहियों के लिए संचालित की जाती ही जिसमें लाखों रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। मामले में स्थानीय अदालत के आदेश के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई।
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क्या है पूरा मामला ?
यह मामला मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले का है जिसमे रोहित भिलाला और विकास भिलाला जो धरती आबा योजना के हितग्राही है। दोनों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि धरती आबा योजना में जो अधिकार उन्हें मिलने चाहिए उसको देने का सिर्फ झांसा दिया जाता है पूरा कभी नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें मत्स्य विभाग की 90 प्रतिशत अनुदान वाली योजना के तहत 18-18 लाख रुपये कीमत के इंसुलेटेड मछली परिवहन वाहन दिलाने का झांसा दिया गया।
इसी के साथ उन्होंने आरोप लगाया कि अनिल चन्द्रपाल, सीताराम चन्द्रपाल और इन्द्रसिंह गुर्जर ने स्वयं को विभाग से जुड़ा बताकर उनके दस्तावेज लिए, बैंक ऑफ बड़ौदा में खाते खुलवाए और छह-छह कोरे चेक पर हस्ताक्षर करा लिए। दोनों भाइयों ने पुष्टि की कि 10 मार्च को धरती आबा योजना के तहत उनके खाते में 18-18 लाख रुपये की सरकारी राशि जमा हुई थी। जिसके अगले दिन ही चेक का उपयोग कर राशि को निजी खेतों के संचालकों में बांट दिया गया। इसके बाद राठी मोटर्स, शाजापुर के माध्यम से दोनों को लगभग 8-8 लाख रुपये कीमत की साधारण लोडिंग बोलेरो बिना बॉडी के दे दी गई।
गाड़ी की हालत इतनी खराब थी कि वह चलने योग्य भी नहीं थी तभी दोनों भाइयों ने मिलकर 1.5-1.5 लाख रुपये लगाकर वाहन को चलने योग्य बनाया। यह पैसा उन्होंने ब्याज पर उधार लिया था। लेकिन उनके सामने सच तब आया जब जनपद पंचायत और बाद में मत्स्य विभाग के पत्रों से पता चला कि शासन ने उनके नाम पर इन्सुलेटेड वाहन स्वीकृत किए थे।
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कार्रवाई न होने पर खटखटाया विशेष न्यायालय का दरवाजा
घोटाले का पता लगते ही दोनों ने कलेक्टर से शिकायत की जब वह बात न बनी तो दोनों सिटी SP के पास गए लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई जिसके बाद उन्होंने विशेष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। केस की गम्भीरता को समझते हुए विशेष न्यायाधीश अंजनी नंदन जोशी ने 30 जुलाई 2026 को आदेश पारित कर अजाक थाना को FIR दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए।
न्यायालय का आदेश सुनते ही पुलिस अधिकारियों ने अनिल चन्द्रपाल, सीताराम चन्द्रपाल, इन्द्रसिंह गुर्जर तथा राठी मोटर्स के संचालक निलेश राठी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई और मामला दर्ज किया। भाइयों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने शिकायत वापस लेने की धमकी भी दी और इसी के साथ बैंक के CCTV फुटेज, चेक, कॉल डिटेल अन्य की भी जांच करने की अपील की है।
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मामले की जांच में जुटी पुलिस
अजाक थाना प्रभारी रामचंद्र नागर ने बताया कि विशेष न्यायालय के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि अगर इस केस में किसी भी मिडिलमैन, बैंक एग्जीक्यूटिव या किसी अन्य का भी हाथ हुआ तो उसके ऊपर सख्त कार्रवाई की जाएगी।





