दिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले कहीं हफ्तों से चल रहा छात्र आंदोलन अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक द्वारा अपना 26 दोनों का आमरण अनशन समाप्त करने के बाद प्रदर्शन स्थल पर जुड़ने वाली भीड़ अब कम होती हुई नजर आई लगभग 25% भीड़ कम हो चुकी है हालांकि आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है लेकिन पहले जैसी ऊर्जा और संख्या अब दिखाई नहीं दे रही।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे थे इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सुधार कथित पेपर लीक मामले में जवाब दे ही था तय करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करना था।
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और हजार लोगों को इससे जुड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन जैसे ही सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अंतिम समाप्त करने की घोषणा की आंदोलन की दिशा में बदलाव देखने को मिला कई प्रदर्शनकारियों ने इस सकारात्मक संकेत माना है जबकि कुछ संगठनों ने कहा कि उनकी मूल मांगे अभी भी पूरी नहीं हुई है और संघर्ष जारी रहेगा।
इसी कारण कुछ लोग प्रदर्शनकारी स्थल से लौट गए जिस भीड़ में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद स्वयंसेवकों के अनुसार पहले जहां पूरे दिन हजारों लोग मौजूद रहते थे अब वही संख्या पहले की तुलना में काफी कम हो गई है हालांकि छात्र संगठनों का कहना है की भीड़ कम होने का मतलब आंदोलन का कमजोर होना नहीं है।
उनका दावा है कि अब आंदोलन के अगले चरण में ले जाने की तैयारी की जा रही है जिस देश भर में विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन का स्वागत किया गया है लेकिन जब तक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाते और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तो तब तक आंदोलन जारी रहेगा उनका कहना है कि केवल अंतिम समाप्त होने से आंदोलन का उद्देश्य पूरा नहीं माना जा सकता।
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उधर प्रशासन का मानना है की स्थिति पहले की तुलना में काफी शांत है सुरक्षा व्यवस्था अभी भी बरकरार रखी गई है लेकिन पहले जैसी अतिरिक्त पुलिस तनाती की आवश्यकता नहीं पड़ रही है अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे पर लगातार सामने आ रही है विपक्षी दल सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगा रहे हैं जबकि सरकार का कहना है कि छात्रों की चिताओं को समझते हुए उचित कदम उठाए जा रहे हैं और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाएगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को नई दिशा और राष्ट्र पहचान दी थी उनके अनशन समाप्त होने के बाद स्वाभाविक रूप से प्रदर्शन की तीव्रता में कुछ कमी आई है लेकिन यदि मांगों पर ठोस प्रगति नहीं होती तो आंदोलन फिर से गति पकड़ सकता है।





