बच्चों में भी हो सकता है हार्ट अटैक, खेलते समय सीने में दर्द को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

क्या बच्चों को भी हार्ट अटैक आ सकता है? जानिए किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, डॉक्टर क्या सलाह देते हैं और कब तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।

Palak Gupta

2 जुलाई 2026

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बच्चों में भी हो सकता है हार्ट अटैक, खेलते समय सीने में दर्द को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

आजकल लोगों के खान-पान के तरीके को बदलने में देरी नहीं लगती जिसका असर अभी तो नहीं लेकिन बाद में जरूर पता चलता है। निरंतर पौष्टिक आहार से मना कर लगातार बाहर का खाना एक दिन बड़ी दिक्कत दे सकता है और इसी से ही जन्म लेती है कई अन्य बीमारियां। अक्सर हार्ट अटैक को बुढ़ापे की बीमारी माना जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि यह बीमारी कुछ मामलों में छोटे बच्चों को भी हो सकती है।

अक्सर हार्ट अटैक आज के समय में एक ऐसी बीमारी बन गया है जो हर एक के घर में डेरा डालें हुए है, जिसके कारण हर साल लाखों की तादाद में लोगों की कार्डियक अरेस्ट के रूप में जान जाती है। पहले इस बीमारी का रोग सिर्फ बुज़ुर्ग लोगों को होता था फिर धीरे-धीरे इस बीमारी की चपेट में कम उम्र के लोग भी आने लगे और अब हालत इतनी बिगड़ गयी है की यह हार्ट अटैक जैसे दिक्कतें बच्चों की जान भी ले सकती है।

 हार्ट अटैक की बात आते ही हमारे मन में डायबिटीज, हाई बीपी से पीड़ित या धूम्रपान करने वालों का ध्यान आता है, लेकिन कई बार मन में ये सवाल उठता है कि क्या बच्चों को भी हार्ट अटैक आ सकता है? इसी विषय पर चर्चा करते हुए गुरुग्राम मेडिकल यूनिवर्सिटी के जाने-माने HOD डॉ. कर्नल अनिल ढल ने कहा कि कुछ मामलों में शिशुओं, बच्चों और किशोरों को भी हार्ट अटैक का खतरा रहता है जिसके कई कारण है।

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किन कारणों बच्चों को आ सकता है अटैक ?

रिपोर्ट्स अक्सर बताती हैं कि ज्यादातर हार्ट अटैक के चान्सेस तब बढ़ते है जब दिल की आर्टरीज में कोलेस्ट्रॉल निरंतर अपनी परत को बढ़ाती जाती है। कोलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण आर्टरीज में ब्लड सप्लाई कम हो जाती है जिसके कारण हार्ट बीट भी तेज हो जाती है। लेकिन छोटे बच्चों में हार्ट अटैक के कारण जन्म से ही उत्पन्न होते है।

डॉक्टरों के अनुसार कुछ बच्चों में जोखिम अधिक हो सकता है जब

  • आर्टरी का जन्मजात डिफेक्ट
  • जन्म से दिल की बीमारी वाले बच्चे
  • परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या अचानक कार्डियक अरेस्ट
  • संक्रमण के बाद दिल में सूजन (Myocarditis)
  • मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल या अनियंत्रित डायबिटीज जैसी समस्याएं

इसके अलावा बच्चों के अंदर एक और डिजीज उत्पन्न हो सकती है जिसका नाम है ‘कावासाकी डिसीज’, डॉक्टर्स के अनुसार यह भी जन्म से ही उत्पन्न होती है। इसके अलावा किसी कारण से हुई हार्ट सर्जरी के बाद की मुश्किलों और कुछ रेयर इन्फ्लेमेशन के कारण भी बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा रहता है।

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इन लक्षणों को बिलकुल न करें नजरअंदाज

यदि आपके आस-पास किसी बच्चे में ऐसे लक्षण दिखे तो उसे नजरअंदाज करना हानिकारक बन सकता है अगर खेलते समय बच्चे को सीने में तेज दर्द हो या वह अचानक बेहोश हो जाए तो उसे तुरंत लिटाकर अस्पताल ले जाएं। यदि बच्चा बेहोश है और सांस नहीं ले रहा, तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) शुरू किया जा सकता है और तुरंत नज़दीकी डॉक्टर के पास ले जाएं।

मांसपेशियों में दर्द, पसलियों में इन्फ्लेमेशन, अस्थमा, निमोनिया, एसिडिटी, स्ट्रेस, मायोकार्डाइटिस (हार्ट मसल्स की इन्फ्लेमेशन) व पेरिकार्डाइटिस जैसे डिसीज भी हार्ट अटैक जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। बाहर के खाने के अलावा युवाओं में नशे की लत भी तेजी से बढ़ रही है, इसी तरह मोटापा, डायबिटीज, ड्रग्स, स्ट्रेस और अनियमित लाइफस्टाइल जैसे कई रिस्क फैक्टर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा रहे है जिससे कार्डियक अरेस्ट की संभावनाएं दुगनी होती जा रही है। ऐसे में सही समय पर डायग्नोसिस, सही ट्रीटमेंट से गंभीर हार्ट डिसीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.