दुनिया पर तेल संकट की आशंका – जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से की बात

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र की स्थिति, समुद्री सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा की।

न्यूज डेस्क - Khabar Mirror

13 मार्च 2026

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India Iran Diplomatic Meeting Oil Crisis Discussion

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया पर तेल संकट का खतरा मंडराने लगा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर अहम बातचीत की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

रिपोर्ट के अनुसार यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है। जयशंकर और अराघची के बीच यह युद्ध शुरू होने के बाद तीसरी बार बातचीत बताई जा रही है।

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने बातचीत के दौरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और समुद्री व्यापार के लिए जो अस्थिर स्थिति बनी है, उसके लिए अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जिम्मेदार है। ईरान का कहना है कि इन कार्रवाइयों से क्षेत्र में तनाव और असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह एक संकरा लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति गुजरती है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

मौजूदा संघर्ष के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। कई तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

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भारत के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या समुद्री व्यापार बाधित होता है तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

इसके अलावा खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं। ऐसे में भारत सरकार के लिए वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय है। यही कारण है कि भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है और क्षेत्र में शांति बहाल करने की कोशिशों का समर्थन कर रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भी जानकारी दी कि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की है और दोनों देशों ने आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई है।

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह व्यापारिक जहाजों पर हमलों और समुद्री मार्गों को बाधित करने के खिलाफ है। भारत का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है।

फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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