भारत के मानसून ने सभी शहरों पर अपनी सक्रियता दिखाना शुरू कर दिया है। कहीं पर बारिश से मौसम और तापमान में सुधार लाया तो कहीं भीषण बारिश से लैंडस्लाइड जैसे हादसे उत्पन्न किये। हाल ही में यानी 20 जुलाई को सिक्किम के नामची जिले में भारी बारिश के बीच एक निर्माणाधीन टनल में लैंडस्लाइड हो गया जिसके कारण टनल की एंट्री बंद हो गई।
बताया जा रहा है कि तीस्ता स्टेज- VI जलविद्युत परियोजना के तहत एक अंडर कंस्ट्रक्शन टनल के बाहर भीषण बारिश के कारण भूस्खलन हो गया जिसकी वजह से सिक्किम में हो रही बारिश ने एक दर्दनाक मोड़ ले लिया। इस लैंडस्लाइड के कारण टनल का मुख्य प्रवेश द्वार मलवे से पूरी तरह से बंद हो गया।
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क्या है पूरा मामला
सिक्किम के पहाड़ी इलाके में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही थी। बारिश के कारण पहाड़ की मिट्टी कमजोर हो गई थी सिक्किम के नामची जिले में सुरंग निर्माण का काम सामान्य रूप से चल रहा था। इसी दौरान अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में चट्टानें और मिट्टी खिसककर सुरंग के मुहाने पर आ गिरीं और देखते ही देखते एंट्री गेट मलबे से भर गया और अंदर मौजूद मजदूर फंस गए हैं। बता दें कि टनल के भीतर 27 मजदूर फस गए है, हालांकि प्रामाणिक रूप से मजदूरों की गिनती की पुष्टि नहीं की गई है। टनल में पटेल इंजीनियरिंग के 21 मजदूर और NHPC के 6 अन्य कर्मचारी फंसे हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए।
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सूचना मिलते ही बचाव दल पहुंचे
प्रशासन को दोपहर 3:00 बजे जब हादसे की सूचना मिली तब तुरंत ही बचाव दल और पुलिस अधिकारियों को तैयार किया गया। बचाव दल ने मौके पर पहुंच कर तुरंत बचाव अभियान शुरू किया इसी के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDFC ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ( SDRF ) और अन्य इमरजेंसी टीम पहुंच गई थी। सबसे पहले इलाके को सुरक्षित किया गया, ताकि दोबारा लैंडस्लाइड होने की स्थिति में बचावकर्मियों की जान खतरे में न पड़े।
बचाव अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने आसपास के लोगों को भी एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने बताया कि सामरदुंग-मामरिंग टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। नामची जिले के डिप्टी कमिश्नर ने भी इसकी पुष्टि की है।
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मीथेन गैस ने बढ़ाई चुनौती
टनल के पास खड़े लोगों ने बताया कि रेस्क्यू टीम को सबसे ज्यादा चुनौती टनल के अंदर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न हो रही मीथेन गैस लैंडस्लाइड के कारण और ज्यादा फैल गई जिसके संपर्क में आकर कई बचाव दल के कर्मचारी चक्कर आने और बेहोश होने की शिकायत कर रहे है। मीथेन गैस आसानी से आग पकड़ने वाली गैस होती है जिसका प्रभाव अंदर फंसे लोगों पर पड़ सकता था इसलिए बचाव दल ने सावधानी को बढ़ाते हुए कदम आगे रखा।
जिला प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सबसे पहली प्राथमिकता टनल में फंसे सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद हादसे की वजह की विस्तार से जांच की जाएगी। इसके अलावा मौसम की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।




