चंडीगढ़ में बढ़ते कैंसर मामले, 2025 में 1014 नए कैंसर मरीज, प्रशासन चिंतित

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में चंडीगढ़ में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू, खराब जीवनशैली और देर से जांच कराना इसके प्रमुख कारण हैं, इसलिए समय पर जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है।

न्यूज डेस्क - Khabar Mirror

24 फ़रवरी 2026

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Chandigarh Cancer Cases 2025 1014 Patients

देश में कैंसर के मामलों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में नए कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। रिपोर्ट लोकसभा में साझा की गई, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2021 में 979 नए मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1014 हो गई।

यानी पांच साल में कुल 35 मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में चंडीगढ़ में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी ज्यादा चिंताजनक मानी जा रही है। साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार लद्दाख में 262, दमन में 650, दादरा एवं नगर हवेली में 789, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 499 और लक्षद्वीप में 84 नए मामले सामने आए। इसके मुकाबले चंडीगढ़ में 1014 नए कैंसर के मरीज दर्ज किए गए, जो बाकी केंद्र शासित प्रदेशों से काफी ज्यादा हैं।

डॉक्टरों के अनुसार कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी कम नहीं है। पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के प्रोफेसर डॉ. जेएस ठाकुर के मुताबिक कैंसर के कुल मरीजों में से लगभग 35 से 40 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। खासकर चौथे चरण में पहुंचे मरीजों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।

महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले 40 से 42 वर्ष की उम्र में अधिक देखे जा रहे हैं, जबकि पुरुषों में 50 से 60 वर्ष की आयु के बीच सिर, गर्दन और फेफड़ों के कैंसर के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग और पीजीआई द्वारा जारी एनसीडी रजिस्ट्री की दूसरी रिपोर्ट में भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जुलाई 2018 से दिसंबर 2021 के बीच दर्ज गैर-संचारी रोगों के मामलों में लगभग 62.9 प्रतिशत मरीज कैंसर से जुड़े पाए गए। महिलाओं में सबसे अधिक स्तन कैंसर के मामले सामने आए, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर प्रमुख रहा।

रिपोर्ट के अनुसार लगभग 35.3 प्रतिशत पुरुष और 48.8 प्रतिशत महिलाएं कैंसर से प्रभावित पाई गईं। महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले करीब 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर लगभग 11.75 प्रतिशत मामलों के साथ प्रमुख बीमारी के रूप में सामने आया है।

डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। तंबाकू का सेवन, धूम्रपान और शराब पीने की आदत, लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहना, आनुवांशिक कारण और खराब खानपान जैसी चीजें इस बीमारी के खतरे को बढ़ाती हैं।

कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर में लगातार थकान रहना, शरीर में गांठ महसूस होना, अचानक वजन बढ़ना या कम होना, त्वचा पर ऐसे घाव जो जल्दी ठीक न हों, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी, निगलने में दिक्कत या आवाज में बदलाव जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक अपच की समस्या भी चेतावनी हो सकती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता ही कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है। यदि शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए और इलाज समय पर शुरू हो जाए तो कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसलिए लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और नियमित जांच करवाने की सलाह दी जा रही है।

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