DMK के K.N नेहरू की बढ़ी मुश्किलें, ₹1,020 करोड़ के टेंडर मामले में FIR, विजय सरकार का बड़ा एक्शन

तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व डीएमके मंत्री के. एन. नेहरू के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी DVAC ने 4 सितंबर को के. एन. नेहरू समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला नगर प्रशासन, शहरी और जल आपूर्ति विभाग से जुड़े करीब 1,020 करोड़ रुपये के ठेकों में कथित गड़बड़ी और ठेकेदारों से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर अवैध रकम लेने के आरोपों से जुड़ा है।

Palak Gupta

8 सितम्बर 2026

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DMK के K.N नेहरू की बढ़ी मुश्किलें, ₹1,020 करोड़ के टेंडर मामले में FIR, विजय सरकार का बड़ा एक्शन

तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े भ्रष्टाचार मामले ने फिर हलचल बढ़ा दी है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। राज्य की Directorate of Vigilance and Anti-Corruption यानी DVAC ने उनके खिलाफ करीब 1,020 करोड़ रुपये के सरकारी टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में FIR दर्ज की है। मामले में नेहरू के अलावा उनके दो भाइयों और कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं।

1,020 करोड़ के टेंडर में क्या है मामला?

DVAC की FIR के मुताबिक मामला 2021 से 2025 के बीच नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग के तहत दिए गए कई सरकारी ठेकों से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कुछ टेंडरों की प्रक्रिया को पहले से प्रभावित किया गया और ठेकेदारों से कथित तौर पर अवैध रकम वसूली गई।

FIR में के.एन. नेहरू को मुख्य आरोपी बताया गया है। उनके भाइयों के.एन. मणिवन्नन और एन. रविचंद्रन के नाम भी दर्ज हैं। इसके अलावा दो पूर्व DMK विधायकों और कुछ सरकारी अधिकारियों, ठेकेदारों तथा अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ सरकारी कामों और टेंडरों की जानकारी बोली प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कथित तौर पर संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती थी। इसके आधार पर पसंदीदा ठेकेदारों की पहचान करने और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।

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‘पार्टी फंड’ के नाम पर रकम लेने का आरोप

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित अवैध वसूली को लेकर है। DVAC के दस्तावेज़ के अनुसार, कुछ सरकारी ठेकों की कुल कीमत का 7.5 से 10 फीसदी तक हिस्सा कथित तौर पर ‘पार्टी फंड’ के नाम पर लिया जाता था।

जांच में डिजिटल सबूतों का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय की पिछली जांच के दौरान बरामद डिजिटल सामग्री, WhatsApp बातचीत, तस्वीरों और फोन से मिले दस्तावेजों का इस्तेमाल मामले की जांच में किया गया है।

FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों के पास सरकारी परियोजनाओं, निरीक्षण और ठेकेदारों से संबंधित जानकारी पहले से उपलब्ध थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है और मामले की जांच अभी जारी है।

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ED की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ा मामला

इस कार्रवाई की कड़ी प्रवर्तन निदेशालय की पिछली जांच से भी जुड़ती है। ED ने 2025 में सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच की थी और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार के साथ साझा की थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बाद में DVAC की कार्रवाई आगे बढ़ी।

मामले में अदालत की कार्यवाही के बाद DVAC को FIR दर्ज करने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ा। इसके बाद सितंबर में एजेंसी ने नेहरू से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी भी ली थी। जांच के दौरान दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जुटाए जाने की बात सामने आई थी।

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विजय सरकार के सत्ता में आने के बाद कार्रवाई तेज

तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी की सरकार बनने के बाद के.एन. नेहरू से जुड़ी यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले भी उनकी संपत्तियों और उनसे जुड़े ठिकानों पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो चुकी है।

डीएमके ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई दस्तावेजों और पहले से चल रही जांच के आधार पर की जा रही है।

FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। DVAC अब आरोपों से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और टेंडर प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में जिन लोगों के नाम FIR में दर्ज हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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