वैश्विक तनाव के बीच भारत में बदला निवेश का तरीका, PE डील में अब ‘रिटर्न’ के साथ रिस्क पर भी नजर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में होने वाले निजी इक्विटी सौदों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशक पहले की तरह सिर्फ रिटर्न नहीं देख रहे, बल्कि कारोबार की मजबूती, आपूर्ति व्यवस्था और भू-राजनीतिक जोखिम को भी तौल रहे हैं।

Palak Gupta

22 अगस्त 2026

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वैश्विक तनाव के बीच भारत में बदला निवेश का तरीका, PE डील में अब ‘रिटर्न’ के साथ रिस्क पर भी नजर

वैश्विक तनाव के बीच भारत ने निवेश के लिए एक बड़ा रास्ता बदला है। लगातार बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही थी। इन हमलों और जियोपॉलिटिकल तनाव ने मुंबई के ब्रोकर्स और प्राइवेट इक्विटी (PE) फंड के फैसले लेने का तरीका बदल दिया है।

बता दें कि Deloitte और IVCA-Bain India Private Equity Report 2026 की रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में विदेशी निवेश का आना बंद नहीं हुआ है, लेकिन अब निवेशकों का मुख्य फोकस ‘हाई रिटर्न’ के साथ-साथ ‘R-फैक्टर’ यानी रेजिलिएंस (Resilience – जोखिम झेलने की क्षमता) पर आ गया है।

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इसके अलावा पश्चिम एशिया के तनाव ने न सिर्फ अर्थव्यवस्था बल्कि अन्य देशों के कारोबार और निवेशकों की चिंता को बढ़ाई है। इसका असर अब भारत में होने वाले प्राइवेट इक्विटी यानी निजी इक्विटी सौदों पर भी दिखाई देने लगा है। मुंबई जैसे बड़े वित्तीय केंद्र में निवेशक अब किसी कंपनी में पैसा लगाने से पहले सिर्फ उसके मुनाफे और बढ़ने की क्षमता पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि संकट की स्थिति में कंपनी कितनी मजबूती से कारोबार चला सकती है।

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PE सौदों की बदलती शर्तें

पहलूपुराना तरीकानया तरीका
निवेश का फोकसतेज बढ़त और ज्यादा रिटर्नटिकाऊ बढ़त और जोखिम पर ज्यादा ध्यान
कंपनी की जांचमुनाफा, बिक्री और बाजार हिस्सेदारीमुनाफे के साथ कारोबार की मजबूती और संकट से निपटने की क्षमता
आपूर्ति व्यवस्थाकम लागत और ज्यादा दक्षताआपूर्ति व्यवस्था में मजबूती और कई स्रोतों का होना
भू-राजनीतिक जोखिमआमतौर पर सीमित महत्वसौदे से पहले अहम जोखिम माना जा रहा है
निवेश का फैसलाविकास की संभावना देखकरविकास के साथ जोखिम और भविष्य की स्थिरता देखकर
एक देश पर निर्भरताज्यादा निर्भरता भी स्वीकार्यनिर्भरता कम करने वाली कंपनियों को प्राथमिकता
सौदे की रणनीतिबड़े और तेज सौदों पर जोरचुनिंदा और सोच-समझकर किए गए सौदों पर जोर
निवेश के बाद ध्यानकारोबार बढ़ाने और मुनाफा बढ़ाने पर जोरमूल्य बढ़ाने के साथ जोखिम कम करने पर भी जोर

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किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा फोकस ?

हाल ही में पता चला है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में निवेशक उन कंपनियों की तरफ निवेश करना सही समझ रहे हैं जो इस कठिन समय पर भी अपनी गतिविधियां जारी रख रहीं हैं। इसमें कई सेक्टर्स आते हैं जैसे डोमेस्टिक आधारित सेक्टर्स जिसमें मजबूत घरेलू मांग है और सरकारी PLI स्कीमों के चलते मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल्स, कंज्यूमर/रिटेल और फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे ज्यादा विदेशी फंड आ रहे हैं।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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