पिछली RBI की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए जिसके कारण आज यानी 5 अगस्त को RBI की तरफ से MPC में लिये गए फैसलों का ऐलान किया जाएगा। बता दें कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) भारत की अर्थव्यवस्था को संतुलित करने हेतु समय-समय पर मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) कंडक्ट करता है जिसका मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रण रखना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना औरबैंकिंग पॉलिसियों को मजबूत बनाए रखना है।
अगस्त में यह बैठक इसलिए ही आयोजित की गई थी जिसमें कई महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की गई उनमें से एक रेपो रेट था। करोड़ों ग्राहकों की निगाह केंद्रीय बैंक की तरफ से रेपो रेट को लेकर किये जाने वाले ऐलान पर बनी थी जिसका फैसला RBI ने सूझ-बुझ कर ले लिया है।
बता दें कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही पॉलिसी स्टांस भी ‘न्यूट्रल’ रखा गया है। बुधवार, 5 अगस्त को मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग खत्म होने के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी जानकारी दी ।
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मिडिल ईस्ट की टेंशन ने बड़ाई चुनौतियां
फरवरी से चल रहे अमेरिका-ईरान द्वेष ने सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों की अर्थव्यवश्ता को चुनौती दी है। भारत को भी मिडिल ईस्ट तनाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। RBI भले ही ब्याज दर को स्थिर रखे, लेकिन रिजर्व बैंक का रुख सख्त रहने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2026 में ही भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया है। पिछले एक दशक में भारतीय करेंसी धरराले से नीचे फिसलती नजर आई है।
इस स्थिति के कारण RBI की बैठक ने 5 बड़े निर्णय लिए है। जिसमें उन्होंने बिना किसी बदलाव के 5.25% पर फिक्स। लगातार चौथी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा SDF रेट 5 प्रतिशत और MSF व बैंक रेट 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला लिया है।
बता दें कि RBI की MPC बैठक में बैठे सभी अधिकारियों यानी 6 सदस्यों वाली टीम ने मिल कर (6-0) से यह फैसला लिया है। बैंक ने पॉलिसी का रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है, यानी आगे हालात देखकर फैसले लिए जाएंगे। फरवरी 2026 के बाद से रेपो रेट में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
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RBI ने रेपो रेट क्यों नहीं बदला?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों में अभी भी अनिश्चितता है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अल नीनो का असर और खाद्य महंगाई जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने फिलहाल “वेट एंड वॉच” यानी इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाई है। RBI का मानना है कि महंगाई की दिशा को लेकर और स्पष्टता आने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
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कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि इस साल देश की GDP करीब 6.7 की दर से बढ़ेगी। वहीं महंगाई के अनुमान में भी कुछ बदलाव किये गए है। जून MPC में RBI ने वैश्विक तनाव के करण बढ़ रही चुनौतियों को देखते हुए GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया है जो की 6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया था। इसमें 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई है।
- जून 2026 तिमाही: 7% (पिछला अनुमान 6.6% था)
- सितंबर 2026 तिमाही: 6.4% (पिछला अनुमान 6.3% था)
- दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5% (पिछला अनुमान भी 6.5% था)
- मार्च 2027 तिमाही: 6.8% (पिछला अनुमान भी 6.8% था)
कुछ बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि RBI ने इस बार संतुलित फैसला लिया है। इससे न तो कर्ज लेने वालों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा और न ही अर्थव्यवस्था को अचानक झटका लगेगा।





