नोएल टाटा के तीन बच्चे पहली बार बने टाटा संस के शेयरहोल्डर, टाटा ग्रुप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के तीन बच्चे-लिआ टाटा, माया टाटा और नेविल टाटा। अब पहली बार टाटा संस के शेयरहोल्डर्स बन गए हैं। यह टाटा ग्रुप के 150 अरब डॉलर के साम्राज्य में अगली पीढ़ी के आगे बढ़ने का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
टाटा संस, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है, जो कंपनी की सबसे बड़ी लिस्टेड इकाइयों जैसे टाटा कंसल्टेंसी सरसेज, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स को नियंत्रित करती है। इसमें करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जबकि बाकी हिस्सा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों और परिवार के सदस्यों समेत अन्य वक्तिगत शेयरहोल्डर्स के पास है।

अब तक नोएल टाटा खुद टाटा संस में सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरहोल्डर रहे हैं, लेकिन उनके तीनों बच्चों का सीधे शेयरहोल्डर बनना यह दिखाता है कि परिवार की अगली पीढ़ी अब कंपनी में औपचारिक रूप से भागीदार बन रही है।
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनाया गया था। उसी समय से यह साफ हो गया था कि उनके बच्चे धीरे-धीरे ग्रुप की अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालेंगे।
तीनों भाई-बहन पहले से ही टाटा ट्रस्ट्स के अंतर्गत आने वाली छोटी ट्रस्ट्स के बोर्ड में शामिल हो चुके हैं, हालांकि अभी तक वे दो सबसे बड़ी ट्रस्ट्स सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल नहीं हुए हैं।
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व्यावसायिक जिम्मेदारियों की बात करें तो नोयल टाटा फिलहाल इंडियन होटल्स कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट हैं और गेटवे होटल्स ब्रांड की देखरेख करती हैं। उन्होंने स्पेन के IE बिजनेस स्कूल से मार्केटिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। वहीं नेविल टाटा ग्रुप के रिटेल कारोबार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और स्टार बाजार का नेतृत्व कर रहे हैं, जो ट्रेंड के अंतर्गत आने वाली हाइपरमार्केट यूनिट है।
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इससे पहले वे जूडियो के परिचालन का भी नेतृत्व कर चुके हैं। सबसे छोटी बहन माया टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा कैपिटल से की थी और बाद में टाटा डिजिटल से जुड़ीं, जहां उन्होंने टाटा न्यू ऐप को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई।
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विश्लेषकों का मानना है कि तीनों भाई-बहनों को अलग-अलग कंपनियों में जिम्मेदारी देने के पीछे मकसद यह है कि हर कोई अपनी रुचि और विशेषज्ञता के हिसाब से नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार हो सके, ताकि आने वाले वर्षों में टाटा ग्रुप का नेतृत्व सुचारू रूप से अगली पीढ़ी को सौंपा जा सके।





