बिहार के सीवान जिले में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने राज्य की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। शनिवार, 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सीवान में छात्र संगठनों का प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच सीधी झड़प हुई। इसी दौरान विशेष जांच दल (SIT) के सदस्य अभिषेक पटेल ने भीड़ पर सीधे AK-47 राइफल से फायरिंग कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि पुलसकर्मी हथियार से गोलियां चला रहा है।
इस फायरिंग में तीन छात्र गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने पुष्टि करते हुए बताया कि अभिषेक पटेल को निलंबित कर दिया गया है। यह इस पूरे मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
दरअसल यह प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा था, जिसकी जड़ में NEET पेपर लीक विवाद है। सीवान में प्रदर्शन के दौरान पहले पत्थरबाजी की खबरें आईं, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया।
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इसी झड़प के दौरान AK-47 से फायरिंग की घटना हुई। इसी तरह की हिंसा राज्यव्यापी बंद के दौरान पटना में भी देखने को मिली, जहां प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और उन्हें पलट दिया।
पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक तीन अलग-अलग FIR दर्ज की हैं, जिनमें करीब 100 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 200 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।
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इस घटना के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे छात्रों के प्रति “हत्यारा” रवैया बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों पर FIR न लगाने और उन्हें रिहा करने के वादे का क्या हुआ। वहीं विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि गिरफ्तार छात्रों और उनके भाई तेज प्रताप यादव को रिहा किया जाए और उन पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं, अन्यथा आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा।





