सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने की जताई तैयारी सांसदों के सामने रखी बड़ी शर्त। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को समाप्त करने की इच्छा जताई है। हालांकि उन्होंने इसके लिए एक अहम शर्त रखी है। वांगचुक का कहना है कि यदि संसद उनकी मांगों को गंभीरता से सुने और उन्हें संसद में उठाने का भरोसा दे तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से जुड़े बड़े मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और सरकार इस विषय को हल्के में ले रही है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में ट्रांसपेरेंसी और सुधार की बहुत ज्यादा जरूरत है।
वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं की आवाज को देश के संसद तक पहुंचना है और उनका सपोर्ट करना है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की है। वे इस मुद्दे को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखें और संसद में इस पर चर्चा करवा उनका कहना है कि यदि संसद भरोसा दिलाए कि उनकी मांगों पर संसद में गंभीर चर्चा होगी तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
सोनम वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उनके आंदोलन के दौरान उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि उनका संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कई तरह की पाबंदियां लगाई है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
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इस बीच उनकी पत्नी गीतांजलि ने भी जानकारी दी की वांगचुक अपनी सेहत को लेकर चिंतित जरूर है लेकिन यदि संसद उनकी मांगों को संसद संसद में उठाने का आश्वासन देती है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने सभी जन्म प्रतिनिधियों से आगे आने और इस मुद्दे पर सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की है।
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सोनम वांगचुक के समर्थन में देश के कई हिस्से में छात्र और सामाजिक संगठन भी सामने आए हैं। कई विश्वविद्यालय और छात्र संगठनों ने उनके आंदोलन का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है। उनका कहना है की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता,जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
हालांकि अभी तक सरकार की और से उनकी शर्तों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या सांसद वांगचुक की अपील पर कोई कदम उठाते हैं। यदि संसद उनकी मांगों को संसद में उठाने का भरोसा देते हैं तो कई दिनों से जारी उनका अनशन समाप्त हो सकता है, वहीं अगर ऐसा नहीं किया तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की बहुत बड़ी संभावना है।





