फोन में बच्चों की अश्लील तस्वीरें रखने वालों पर सख्ती, कानपुर के बाद वाराणसी में भी दर्ज हुए मामले, बच्चों और किशोर-किशोरियों से जुड़ी यौन संबंधी आपत्तिजनक सामग्री को मोबाइल फोन या क्लाउड सेवाओं में स्टोर करने वालों पर अब पुलिस सीधी कार्रवाई कर रही है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल हैश-मैचिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। गूगल ड्राइव, गूगल फोटोज और जीमेल जैसी क्लाउड सेवाओं पर अब सीधी निगरानी रखी जा रही है, जिससे ऐसे मामले तेजी से पकड़ में आ रहे हैं।
वाराणसी में साइबर सेल प्रभारी मनोज तिवारी के अनुसार, मेटा और गूगल की तरफ से एआई के जरिए यह निगरानी की जा रही है। इन प्लेटफॉर्म्स पर अगर किसी अकाउंट में बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री मिलती है, तो उस यूजर की जानकारी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या अन्य केंद्रीय एजेंसियों को भेजी जाती है। वहां से मिली सूचना के आधार पर स्थानीय पुलिस संबंधित व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर रही है।
अमित वर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, अब सिर्फ संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट को निलंबित करने तक बात सीमित नहीं रह गई है, बल्कि फोन में इस तरह की सामग्री मिलने पर सीधे कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी क्रम में सबसे पहला मामला कानपुर में सामने आया, जहां एक युवक को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि उसने अपने फोन में परिवार की बच्चियों और महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री स्टोर कर रखी थी।
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इस गिरफ्तारी के बाद वाराणसी में भी इसी तरह के दो मामले दर्ज किए गए हैं। पहला मामला 14 जुलाई को बड़ागांव थाना क्षेत्र का है, जहां सोनरबसा निवासी शिवशंकर सिंह नामक युवक पर केस दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार उसने बच्चों और किशोरियों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री का एक वीडियो अपलोड किया था और साथ ही उसे गूगल ड्राइव पर स्टोर भी कर रखा था।
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दूसरा मामला लंका थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां शनिवार को पुलिस ने कृष्णा नगर कॉलोनी निवासी अंकुर कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस को उसके मोबाइल फोन में भी बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। यह कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल से मिली सूचना के आधार पर की गई।
दोनों ही मामलों में आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक की मदद से इस तरह के अपराधों पर नजर रखना और आरोपियों तक पहुंचना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है, और आने वाले समय में ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं।





